नई दिल्ली: वैश्विक तनाव, विशेषकर पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कच्चे तेल के आयात को 41 देशों तक विस्तारित किया है। घरेलू उत्पादन में स्थिरता के बीच यह कदम उठाया गया है।
लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि सरकार देश में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन की निरंतर निगरानी और समीक्षा कर रही है।
आंकड़ों के अनुसार, भारत में कच्चे तेल का उत्पादन 2022–23 में 29.18 मिलियन मीट्रिक टन (MMT), 2023–24 में 29.36 MMT और 2024–25 में घटकर 28.71 MMT रहा है।

वहीं प्राकृतिक गैस उत्पादन में वृद्धि देखी गई है, जो 2022–23 में 34.45 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) से बढ़कर 2023–24 में 36.43 BCM हुआ और 2024–25 में 36.13 BCM पर स्थिर रहा।
सरकार ने वैश्विक आपूर्ति बाधाओं से बचाव के लिए आयात स्रोतों का विविधीकरण किया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां अब मध्य पूर्व के पारंपरिक स्रोतों के अलावा अमेरिका, नाइजीरिया, अंगोला, कनाडा, कोलंबिया, ब्राजील और मैक्सिको जैसे देशों से भी कच्चा तेल आयात कर रही हैं।
इस रणनीति का उद्देश्य किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

