नई दिल्ली: देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को दावा किया कि आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा में मौजूद दो-तिहाई से अधिक सांसद पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं।
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चड्ढा ने कहा कि कुल 10 AAP सांसदों में से दो-तिहाई से अधिक उनके साथ हैं और उन्होंने संविधान के प्रावधानों के तहत विलय के लिए आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। “आज सुबह हमने हस्ताक्षरित पत्र और दस्तावेज राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि इस फैसले के समर्थन में तीन सांसद मंच पर मौजूद थे, जबकि हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम सहनी और स्वाति मालीवाल समेत अन्य सांसद भी इस कदम के साथ हैं।
अपने संबोधन में राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “जिस पार्टी को मैंने 15 साल तक अपने खून-पसीने से सींचा, वह अब अपने सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिकता से भटक चुकी है। यह अब देशहित में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत लाभ के लिए काम कर रही है।”
भावुक होते हुए उन्होंने दोहराया, “मैं सही आदमी हूं, लेकिन गलत पार्टी में हूं,” और घोषणा की कि वह AAP से खुद को अलग कर रहे हैं और सीधे जनता के बीच जाएंगे।
चड्ढा ने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि वह पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं और उन्होंने दिल्ली में पार्टी को खड़ा करने से लेकर पंजाब तक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के लोग—वैज्ञानिक, शिक्षाविद, खिलाड़ी और सामाजिक कार्यकर्ता—भ्रष्टाचार मुक्त भारत के सपने के साथ इस पार्टी से जुड़े थे।
“आज बेहद दुख, पीड़ा और शर्म के साथ कहना पड़ रहा है कि वही पार्टी अब भ्रष्ट और समझौता कर चुके लोगों के कब्जे में है। जो देशभक्त लोग देश सेवा के लिए AAP में आए थे, वे एक-एक कर पार्टी छोड़ रहे हैं,” उन्होंने आरोप लगाया।
राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने से लेकर भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थान दिलाने तक कई साहसिक फैसले लिए हैं। “देश की जनता ने इस नेतृत्व को बार-बार समर्थन दिया है। हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में काम करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह जनता के मुद्दों को पहले की तरह ही मजबूती से उठाते रहेंगे। “कई लोगों को चिंता थी कि मेरी आवाज मेरी ही पार्टी में दबा दी गई थी। मैं उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूं कि मैं उसी प्रतिबद्धता और ऊर्जा के साथ आपके मुद्दे उठाता रहूंगा,” उन्होंने कहा।
यदि यह दावा औपचारिक रूप लेता है, तो राज्यसभा में शक्ति संतुलन पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

