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समुद्र मंथन से निकला ऊर्जा का नया ‘अमृत’: अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस की खोज से भारत के ऊर्जा मिशन को बड़ी ताकत

नई दिल्ली, 5 जून: भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस की खोज को भारत के आधुनिक ‘समुद्र मंथन’ का एक और महत्वपूर्ण परिणाम बताते हुए कहा कि यह खोज देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए पुरी ने ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को बधाई दी और इसे “ऊर्जा अवसरों का महासागर” करार दिया।

यह खोज श्री विजयपुरम-3 नामक अन्वेषण कुएं में हुई है, जिसे अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर 355 मीटर गहरे समुद्री क्षेत्र में ड्रिल किया गया था।

प्रारंभिक परीक्षणों में लगभग 1,900 मीटर से अधिक गहराई वाले इओसीन संरचना क्षेत्र में लगातार फ्लेयरिंग के माध्यम से प्राकृतिक गैस की उपस्थिति की पुष्टि हुई है।

आधुनिक भारत का ‘समुद्र मंथन’

हरदीप सिंह पुरी ने इस उपलब्धि को पौराणिक समुद्र मंथन से जोड़ते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन से अंततः अमृत प्राप्त हुआ था, उसी प्रकार भारत अपने समुद्री क्षेत्रों में छिपे ऊर्जा भंडारों की खोज कर रहा है।

उन्होंने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2025 पर घोषित ‘समुद्र मंथन मिशन’ (राष्ट्रीय गहरे समुद्री अन्वेषण मिशन) की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस मिशन के तहत भारत के अपतटीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर कुओं की ड्रिलिंग की जा रही है, ताकि देश के हाइड्रोकार्बन संसाधनों का पूर्ण दोहन किया जा सके।

तीन में से दो कुओं में मिला हाइड्रोकार्बन

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्तमान अंडमान बेसिन अन्वेषण अभियान के दौरान ऑयल इंडिया द्वारा ड्रिल किए गए तीन कुओं में से दो में हाइड्रोकार्बन की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है।

इससे यह संकेत मिलता है कि अंडमान बेसिन भविष्य में भारत के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा क्षेत्रों में से एक बन सकता है।

वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के साथ बढ़ेगा सहयोग

पुरी ने कहा कि यह खोज भारत की अन्वेषण महत्वाकांक्षाओं को नई गति देगी और देश को पेट्रोब्रास, टोटल एनर्जीज़, बीपी, शेल और एक्सॉनमोबिल जैसी वैश्विक डीपवॉटर विशेषज्ञ कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ाने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि भारत अब अपतटीय ऊर्जा अन्वेषण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

केंद्रीय मंत्री ने इस खोज को ‘अमृत काल’ में भारत की ऊर्जा यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि घरेलू तेल और गैस संसाधनों की खोज देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।

ऑयल इंडिया फिलहाल गैस के नमूनों का परीक्षण कर रही है ताकि उसकी संरचना, ऊष्मीय क्षमता (कैलोरिफिक वैल्यू) और उत्पत्ति का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा सके।

अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस की यह नई खोज भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए उस ‘अमृत’ की तरह मानी जा रही है, जिसकी तलाश देश लंबे समय से अपने आधुनिक समुद्र मंथन के माध्यम से कर रहा है।

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