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दिल्ली में अब नहीं चलेगा ‘सिस्टम फेलियर’ का बहाना? अवैध निर्माण, फायर नियम उल्लंघन और मिलीभगत पर आशीष सूद का बड़ा एक्शन प्लान

नई दिल्ली, 5 जून: मालवीय नगर अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में अवैध निर्माण, फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन और अधिकारियों की मिलीभगत के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। गृह मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही, भ्रष्टाचार या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए आशीष सूद ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल हादसे के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसा मजबूत और जवाबदेह सिस्टम तैयार करना है जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पूरी तरह रोकी जा सके।

मालवीय नगर हादसे के बाद बड़ा प्रशासनिक सुधार

आशीष सूद ने कहा कि हाल के दिनों में अवैध निर्माण, फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण हुई घटनाओं को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में विभिन्न एजेंसियों—एमसीडी, डीडीए, दिल्ली फायर सर्विस, डिस्कॉम और दिल्ली पुलिस—के बीच जिम्मेदारियों के बिखराव के कारण अक्सर नियमों का सख्ती से पालन नहीं हो पाता था और अधिकारी जवाबदेही से बच निकलते थे।

इसी व्यवस्था को बदलने के लिए सरकार ने जिला मजिस्ट्रेटों (DM) की शक्तियों को और अधिक मजबूत करने का फैसला किया है।

जिला मजिस्ट्रेटों को मिली बड़ी ताकत

नई व्यवस्था के तहत जिला मजिस्ट्रेट अपने-अपने क्षेत्रों में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की जवाबदेही तय कर सकेंगे।

जरूरत पड़ने पर वे सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर सकेंगे, एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश कर सकेंगे और अपने कर्तव्यों में विफल पाए गए अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई कर सकेंगे।

सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित होगी और किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी से बचने की गुंजाइश नहीं रहेगी।

लापरवाह अधिकारियों पर भी होगी व्यक्तिगत कार्रवाई

गृह मंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (DDMA Act) के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू कर दिया है।

यदि किसी सरकारी अधिकारी की लापरवाही, मिलीभगत या भ्रष्ट आचरण के कारण जनहानि या संपत्ति का नुकसान होता है तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

ऐसे मामलों में केवल निलंबन तक सीमित कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि कानूनी कार्रवाई, वित्तीय दायित्व तय करने और अन्य कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं।

होटल, गेस्ट हाउस और कमर्शियल इमारतों की होगी व्यापक जांच

सरकार ने जिला मजिस्ट्रेटों की अध्यक्षता में संयुक्त जांच समितियों (Joint Committees) का गठन कर दिया है।

इन समितियों में दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, डिस्कॉम, एमसीडी और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

ये समितियां अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित सभी गेस्ट हाउस, होटल, रेस्तरां, बैंक्वेट हॉल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का गहन निरीक्षण करेंगी।

जहां भी लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन, अवैध संचालन या फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी पाई जाएगी, वहां तत्काल सीलिंग और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

G+4 से ऊंची इमारतें भी जांच के दायरे में

आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली में स्वीकृत सीमा से अधिक ऊंचाई पर संचालित सभी G+4 इमारतों की समीक्षा की जाएगी।

जहां भी अवैध निर्माण, अतिरिक्त मंजिलें या स्वीकृत नक्शे का उल्लंघन मिलेगा, वहां तत्काल सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

‘रसूखदारों को भी नहीं मिलेगी सुरक्षा’

गृह मंत्री ने दो टूक कहा कि दिल्ली सरकार भ्रष्टाचार, मिलीभगत और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि किसी भी रसूखदार व्यक्ति, बिल्डर, होटल मालिक या अधिकारी को राजनीतिक अथवा प्रशासनिक संरक्षण नहीं दिया जाएगा।

सूद ने कहा कि दिल्लीवासियों की जान-माल की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इससे खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

मालवीय नगर अग्निकांड के बाद घोषित यह नया एक्शन प्लान राजधानी में भवन सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के सख्त अनुपालन की दिशा में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

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