Date:

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद MCD का सख्त आदेश: रिहायशी संपत्तियों के दुरुपयोग की पहचान के लिए 7 दिन की डेडलाइन

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद नगर निगम दिल्ली (MCD) ने रिहायशी परिसरों के गैर-रिहायशी उपयोग की पहचान के लिए सभी ज़ोनल डिप्टी कमिश्नरों को अत्यंत जरूरी और प्राथमिकता वाले आदेश जारी किए हैं।

20 अप्रैल 2026 को जारी आधिकारिक आदेश में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी के सभी नगर निगमों को इस मामले में पक्षकार बनाते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक जांच करने के निर्देश दिए हैं।

इन निर्देशों के अनुपालन में MCD आयुक्त संजीव खिरवार ने सभी ज़ोनल अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे समयबद्ध और विस्तृत सर्वेक्षण के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों की पहचान करें, जहां रिहायशी उपयोग के लिए निर्धारित संपत्तियों का इस्तेमाल व्यावसायिक या अन्य गैर-रिहायशी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद MCD का सख्त आदेश: रिहायशी संपत्तियों के दुरुपयोग की पहचान के लिए 7 दिन की डेडलाइन

जांच का दायरा

इस विशेष अभियान में निम्नलिखित क्षेत्रों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है:

  • सभी रिहायशी कॉलोनियां, जिनमें अनधिकृत, नियमित और स्वीकृत कॉलोनियां शामिल हैं
  • ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और प्लॉटेड डेवलपमेंट्स
  • MCD के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी क्षेत्र, जिनमें वे भौगोलिक ‘आइलैंड’ या पॉकेट्स भी शामिल हैं, जो प्रशासनिक सीमाओं से बाहर हो सकते हैं लेकिन MCD क्षेत्र से घिरे हुए हैं

अधिकारियों के लिए प्रमुख निर्देश

  • ज़ोनल डिप्टी कमिश्नरों को निम्नलिखित कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं:
  • अपने-अपने क्षेत्रों में विस्तृत फील्ड सर्वे और सत्यापन करना
  • सभी मामलों की ज़ोन-वाइज विस्तृत सूची तैयार करना
  • सुनिश्चित करना कि एकत्रित डेटा सटीक, सत्यापित और दस्तावेजों द्वारा समर्थित हो, क्योंकि इसे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए जाने वाले हलफनामे का आधार बनाया जाएगा
  • किसी भी चूक या गलत रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदारी तय करना

सख्त समय सीमा

MCD ने स्पष्ट किया है कि सभी ज़ोनल रिपोर्ट्स को 7 दिनों के भीतर अतिरिक्त आयुक्त (इंजीनियरिंग) को सौंपना अनिवार्य होगा। इसके बाद समेकित रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे के रूप में प्रस्तुत की जाएगी, जिसे आयुक्त स्वयं प्रमाणित करेंगे।

लापरवाही पर सख्त चेतावनी
आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को देखते हुए किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

‘टॉप प्रायोरिटी’ का दर्जा
इस पूरे अभियान को “MOST URGENT / TOP PRIORITY” श्रेणी में रखा गया है, जिससे इसकी गंभीरता और तात्कालिकता स्पष्ट होती है।

इस कार्रवाई का दिल्ली के कई इलाकों पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है, जहां रिहायशी परिसरों का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। आने वाले दिनों में ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Share post:

Popular

More like this
Related

सार्वजनिक परीक्षा अपराधों की जांच के लिए दिल्ली पुलिस ने विशेष कार्यबल का गठन किया

दिल्ली, 24 जुलाई: दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत प्रश्नपत्र लीक तथा अन्य परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच के लिए अपनी क्राइम ब्रांच...

जंतर-मंतर प्रदर्शन पर निगरानी के आरोप निराधार, सुरक्षा के लिए लगाए गए एफआरएस कैमरे: दिल्ली पुलिस

नई दिल्ली, 24 जुलाई: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के आसपास लगाए गए फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) कैमरों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों की निगरानी किए जाने के आरोपों को खारिज करते...

दिल्ली पुलिस की चेतावनी: 400 से अधिक पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल फैला रहे हैं फर्जी सामग्री

नई दिल्ली, 24 जुलाई: दिल्ली पुलिस ने कहा है कि 400 से अधिक पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल की पहचान की गई है, जो कथित तौर पर भ्रामक सूचनाएं और अफवाहें...

सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने गठित की फास्ट-ट्रैक अदालत

नई दिल्ली, 24 जुलाई: दिल्ली हाई कोर्ट ने सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए तत्काल प्रभाव से एक नई फास्ट-ट्रैक...