नई दिल्ली: भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत लागू नए आपराधिक कानूनों की प्रभावशीलता का बड़ा उदाहरण पेश करते हुए दिल्ली पुलिस के आउटर नॉर्थ जिले ने एक लूट के मामले में महज़ 18 दिनों के भीतर आरोपी को दोषी करार दिलाने में सफलता हासिल की है। इसे जिले के सबसे तेज़ स्ट्रीट क्राइम कन्विक्शन मामलों में से एक माना जा रहा है।
यह मामला शाहबाद डेयरी थाना क्षेत्र का है, जहां 18 अप्रैल 2026 की शाम एक 21 वर्षीय युवती से प्रह्लादपुर बस स्टैंड के पास उसका iPhone 15 लूट लिया गया था।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने पहले युवती के साथ हाथापाई की और फिर मोबाइल छीनकर भागने की कोशिश की। उसी दौरान इलाके में पेट्रोलिंग कर रहे बीट हेड कांस्टेबल विक्रम ने पीड़िता की आवाज सुनते ही तुरंत कार्रवाई की और पीड़िता के साथ मिलकर आरोपी का पीछा किया।
आरोपी की पहचान पंकज (22), पुत्र मोनू के रूप में हुई, जिसे जैन कॉलोनी गेट नंबर-3 के पास पकड़ लिया गया। उसके कब्जे से लूटा गया iPhone भी बरामद कर लिया गया।
पीड़िता के बयान पर एफआईआर नंबर 217/26 दर्ज की गई और भारतीय न्याय संहिता की धारा 309(4) और 317(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

रिकॉर्ड समय में जांच और ट्रायल
दिल्ली पुलिस के मुताबिक:
- जांच मात्र 72 घंटे में पूरी कर ली गई
- 5 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी गई
यह पूरा मामला आउटर नॉर्थ जिले के डीसीपी हरेश्वर स्वामी, IPS के निर्देशन में स्ट्रीट क्राइम मामलों के त्वरित निपटारे के विशेष अभियान के तहत फास्ट-ट्रैक किया गया।
केस की प्रमुख टाइमलाइन
- घटना की तारीख: 18 अप्रैल 2026
- जांच पूरी: 21 अप्रैल 2026 (3 दिन)
- चार्जशीट दाखिल: 23 अप्रैल 2026 (5 दिन)
- चार्ज फ्रेम: 29 अप्रैल 2026 (11 दिन)
- फैसला और दोष सिद्ध: 6 मई 2026 (घटना के 18 दिन बाद / चार्जशीट के 13 दिन बाद)

अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया
मामले की सुनवाई रोहिणी कोर्ट की JMFC-05 न्यायाधीश भारती बेनीवाल की अदालत में दिन-प्रतिदिन के आधार पर की गई।
6 मई 2026 को अदालत ने आरोपी पंकज को भारतीय न्याय संहिता की धारा 309(6) और 317(2) के तहत दोषी करार दिया।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि अदालत ने जांच एजेंसी की तत्परता, पेशेवर तरीके से सबूत जुटाने और तेज़ कार्रवाई की विशेष सराहना की।
पुलिस टीम को मिलेगा सम्मान
पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व इंस्पेक्टर राजेश मलिक (SHO, शाहबाद डेयरी), पर्यवेक्षण ACP जोगिंदर सिंह (बवाना), जांच टीम SI सतीश, HC विक्रम और कॉन्स्टेबल विपिन कुमार ने किया।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले को नए आपराधिक कानूनों के तहत “स्पीडी इन्वेस्टिगेशन, स्पीडी ट्रायल और स्पीडी जस्टिस” का मजबूत उदाहरण बताया है।

