नई दिल्ली, 16 अगस्त: राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की सुपारी को बांग्लादेशी मूल की बताकर भारत में आयात करने और दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) के तहत सीमा शुल्क में रियायत का कथित रूप से गलत लाभ उठाने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, जांच में अब तक ₹2,500 करोड़ से अधिक के संभावित राजस्व नुकसान का पता चला है और मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
एक महीने तक खुफिया सूचनाओं के आधार पर चली कार्रवाई में DRI को पता चला कि सिंडिकेट इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से सुपारी मंगाकर उसके मूल देश के रूप में बांग्लादेश की गलत घोषणा कर रहे थे।
भारत में सुपारी के आयात पर 100 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क लगता है। हालांकि, SAFTA समझौते के तहत पात्र आयात पूरी तरह सीमा शुल्क मुक्त हैं। बांग्लादेश मूल की सुपारी निर्धारित Rules of Origin मानदंडों को पूरा करने पर इस छूट की पात्र होती है।
DRI ने कोलकाता और विशाखापत्तनम में आयातकों, कस्टम्स ब्रोकर्स और Importer Exporter Code धारकों से जुड़े कई परिसरों में एक साथ तलाशी ली। एजेंसी के अनुसार, तलाशी में ऐसे दस्तावेज और साक्ष्य मिले जिनसे सुपारी के दक्षिण-पूर्व एशियाई मूल का पता चला।
अधिकारियों ने करीब ₹75 लाख नकद भी जब्त किए, जिन्हें अवैध रूप से आयातित माल की बिक्री से प्राप्त राशि माना जा रहा है। इसके अलावा करीब 160 मीट्रिक टन सुपारी की एक खेप भी जब्त की गई।
जांच के अनुसार, कथित मास्टरमाइंड दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से सुपारी को बांग्लादेश के एक Export Processing Zone तक पहुंचाते थे। इसके बाद कथित तौर पर केवल कंटेनर और बोरियां बदलकर माल को बांग्लादेशी मूल का दिखाते हुए भारत भेजा जाता था।
DRI ने कहा कि बांग्लादेशी अधिकारियों से SAFTA Certificates of Origin कथित रूप से धोखाधड़ी से हासिल किए गए थे। कथित मास्टरमाइंड भारतीय आयातकों से माल की रूटिंग, दस्तावेज, क्लीयरेंस और परिवहन की व्यवस्था के लिए भारी कमीशन लेते थे तथा बड़ी मात्रा में भुगतान नकद में एकत्र किया जाता था।
जांच में वित्तीय आय को स्थानांतरित करने और उसकी लेयरिंग के लिए हवाला चैनलों तथा डमी संस्थाओं के इस्तेमाल का भी पता चला है।
DRI के अनुसार, एक कस्टम्स ब्रोकर फर्म मामले में चिह्नित अधिकांश कथित फर्जी सुपारी आयातों की क्लीयरेंस के लिए विशेष रूप से जिम्मेदार पाई गई। जांच के बाद सक्षम प्राधिकारी ने उस फर्म का कस्टम्स ब्रोकर लाइसेंस निलंबित कर दिया है।
अब तक की जांच में संकेत मिले हैं कि हाल के वर्षों में ऐसे आयातों के जरिए ₹2,500 करोड़ से अधिक के सीमा शुल्क की चोरी हुई हो सकती है। मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया कि इस तरह के अवैध आयात से घरेलू सुपारी उत्पादकों और वैध व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, कीमतों में अनुचित विकृति पैदा होती है और वैध कारोबार के लिए समान प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होने के साथ विनियमित व्यापार व्यवस्था और सीमावर्ती क्षेत्रों की आर्थिक सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
DRI ने कहा कि इस कार्रवाई से मूल देश की व्यवस्थित गलत घोषणा, SAFTA लाभ के कथित फर्जी इस्तेमाल और बड़े पैमाने पर सीमा शुल्क चोरी में शामिल एक संगठित नेटवर्क को बाधित किया गया है।

