नई दिल्ली, 9 जून: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दिल्ली जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लगभग ₹100 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनल अटैच) की हैं। ये संपत्तियां एम/एस जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड और एम/एस इन्वेस्टर्स क्लिनिक इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
ईडी के अनुसार, जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड की कुर्क संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग ₹40 करोड़ है, जबकि इन्वेस्टर्स क्लिनिक इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड की संपत्तियों का मूल्य करीब ₹60 करोड़ है। इस नवीनतम कार्रवाई के साथ मामले में अब तक की कुल कुर्की लगभग ₹500 करोड़ तक पहुंच गई है।
यह कार्रवाई जयपी इंफ्राटेक लिमिटेड (JIL), जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) तथा उनसे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। जांच कथित बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी, धन के दुरुपयोग और सार्वजनिक धन के गबन से जुड़ी हुई है।
ईडी ने बताया कि जांच की शुरुआत दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज कई एफआईआर तथा जयपी विशटाउन और जयपी ग्रीन्स परियोजनाओं के हजारों होमबायर्स की शिकायतों के आधार पर की गई थी। शिकायतकर्ताओं ने कंपनी और उसके प्रमोटरों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप लगाए थे।

जांच में सामने आया कि आवासीय परियोजनाओं के निर्माण और उन्हें पूरा करने के लिए होमबायर्स से जुटाई गई राशि को कथित रूप से अन्य उद्देश्यों के लिए डायवर्ट किया गया, जिससे हजारों खरीदारों को नुकसान हुआ और कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं।
ईडी के अनुसार, जेएएल और जेआईएल ने होमबायर्स से लगभग ₹32,825 करोड़ जुटाए थे, जैसा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के समक्ष स्वीकार किया गया था। जांच में पाया गया कि इस राशि का एक बड़ा हिस्सा निर्माण कार्यों के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया और विभिन्न संबंधित संस्थाओं को हस्तांतरित किया गया, जिनमें जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है।
जांच में यह भी पता चला कि अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) को भूमि एवं अन्य अचल संपत्तियों के रूप में इन्वेस्टर्स क्लिनिक इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड में पार्क किया गया था।
ईडी ने कहा कि जयपी इंफ्राटेक लिमिटेड और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मनोज गौर ने कथित रूप से धन के डायवर्जन और उससे जुड़े लेन-देन की योजना बनाने तथा उसे अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
जांच के आधार पर ईडी ने 13 नवंबर 2025 को मनोज गौर को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया था। वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।
इससे पहले, 7 जनवरी 2026 को ईडी ने लगभग ₹400 करोड़ मूल्य की प्रत्यक्ष अपराध आय (Direct Proceeds of Crime) को कुर्क करते हुए एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया था। इसके बाद 8 जनवरी 2026 को विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की गई, जिसमें मनोज गौर को आरोपी बनाया गया।
ईडी ने कहा कि नवीनतम कुर्की कार्रवाई से कथित रूप से होमबायर्स के धन से अर्जित संपत्तियों की पहचान और उन्हें जब्त करने की प्रक्रिया को और मजबूती मिली है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि मामले की आगे की जांच जारी है।

