जनकपुरी के निजी स्कूल को सुरक्षा और वित्तीय अनियमितताओं पर दिल्ली सरकार का कारण बताओ नोटिस

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नई दिल्ली, 19 जुलाई: दिल्ली सरकार ने जनकपुरी स्थित एक निजी स्कूल को कथित सुरक्षा चूक, अनधिकृत संचालन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह वही स्कूल है जहां इस वर्ष एक नर्सरी छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आया था।

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शिक्षा निदेशालय (डीओई) को स्कूल के प्रबंधन ट्रस्ट और नेतृत्व के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। विशेष डीओई समितियों द्वारा की गई बहु-स्तरीय जांच में प्रशासनिक विफलता और कथित घटना को छिपाने के प्रयास के संकेत मिले हैं।

जांच के अनुसार, स्कूल प्रबंधन ने अप्रैल में परिसर में हुई कथित छेड़छाड़ की घटना की जानकारी शिक्षा निदेशालय को नहीं दी, जो अनिवार्य बाल संरक्षण प्रावधानों का उल्लंघन माना गया है।

जांच में यह भी पाया गया कि परिसर में लगे सभी 64 सीसीटीवी कैमरे बंद थे और स्कूल बिना किसी रखरखाव अनुबंध के निगरानी व्यवस्था चला रहा था।

रिपोर्ट में आरोप है कि स्कूल जनकपुरी के नारंग कॉलोनी स्थित एक निजी आवासीय भवन से बिना अनुमति नर्सरी और केजी कक्षाएं संचालित कर रहा था। भवन के बेसमेंट का उपयोग बच्चों की गतिविधियों के लिए बिना पर्याप्त निगरानी के किया जा रहा था।

जांच में यह भी पाया गया कि स्कूल में न तो चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी थी, न चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी और न ही पॉक्सो-प्रशिक्षित नोडल अधिकारी। सुरक्षा कर्मियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल का अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र (फायर एनओसी) वर्ष 2020 में समाप्त हो गया था और उसके बाद उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया।

वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में जांच में आरोप लगाया गया कि कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभ के लिए निर्धारित लगभग 6 करोड़ रुपये दूसरी शाखा को कथित ऋण निपटान के नाम पर स्थानांतरित कर दिए गए। स्कूल निधि से प्रबंधक और ट्रस्टियों को अनधिकृत पेशेवर शुल्क का भुगतान भी किए जाने का आरोप है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन में चार महीने तक की देरी हुई और उन्हें पुराने वेतनमान के अनुसार भुगतान किया गया। वहीं, स्कूल ने 2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए छात्रों की फीस में 15 प्रतिशत की वृद्धि की, जो उच्च न्यायालय की सीमाओं के विपरीत बताई गई है।

स्कूल को अपना जवाब दाखिल करने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने पर सरकार ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

आशीष सूद ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्कूल बच्चों के प्रति कानूनी और नैतिक रूप से जिम्मेदार हैं और आवश्यकता पड़ने पर सरकार स्कूल का प्रबंधन अपने हाथ में लेने तथा उसकी भूमि लीज रद्द करने की सिफारिश करने के लिए तैयार है।

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