नई दिल्ली, 24 जून: दिल्ली सरकार ने राजधानी में टैंकरों के माध्यम से जल आपूर्ति में रिकॉर्ड वृद्धि का दावा करते हुए इसे बड़ी उपलब्धि बताया है। हालांकि, इन आंकड़ों ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या टैंकरों पर बढ़ती निर्भरता वास्तव में सफलता का संकेत है या फिर स्थायी जल आपूर्ति व्यवस्था की कमी को दर्शाती है।
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 में प्रतिदिन सक्रिय 726 टैंकरों की संख्या बढ़कर मई 2026 में 1,098 हो गई, यानी एक वर्ष में 372 अतिरिक्त टैंकर संचालन में लगाए गए।
इसी तरह, मई 2025 में 1,06,501 टैंकर ट्रिप्स दर्ज की गई थीं, जबकि मई 2026 में यह संख्या बढ़कर 1,88,618 ट्रिप्स तक पहुंच गई। यानी एक वर्ष में 82,117 अतिरिक्त टैंकर ट्रिप्स संचालित की गईं।
दिल्ली जल बोर्ड ने दावा किया है कि जरूरतमंद क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने के लिए यह व्यवस्था मजबूत की गई है और रियल-टाइम ट्रैकिंग एवं लाइव मॉनिटरिंग के माध्यम से जल आपूर्ति को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाया गया है।
जारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वर्तमान में 1,188 टैंकरों का नेटवर्क कार्यरत है, जिसमें 1,083 किराए के टैंकर और 101 विभागीय टैंकर शामिल हैं।
हालांकि, इन आंकड़ों को लेकर विपक्षी दलों और शहरी मामलों के जानकारों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि राजधानी में टैंकरों की संख्या और ट्रिप्स लगातार बढ़ रही हैं, तो इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि बड़ी संख्या में नागरिक अब भी नियमित पाइपलाइन आधारित जल आपूर्ति से वंचित हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि टैंकर व्यवस्था गर्मी या आपातकालीन परिस्थितियों में एक अस्थायी समाधान हो सकती है, लेकिन किसी भी विकसित शहर के लिए स्थायी समाधान मजबूत पाइपलाइन नेटवर्क, जल भंडारण क्षमता, रिसाव नियंत्रण और दीर्घकालिक जल प्रबंधन व्यवस्था ही है।
दिल्ली जल बोर्ड जहां इसे सेवा विस्तार का नया कीर्तिमान बता रहा है, वहीं आलोचकों का तर्क है कि किसी सरकार के लिए वास्तविक उपलब्धि तब मानी जाएगी जब टैंकरों की जरूरत कम हो और हर घर तक नियमित एवं भरोसेमंद जलापूर्ति सुनिश्चित हो।
फिलहाल, बढ़ते टैंकरों और बढ़ती टैंकर ट्रिप्स के आंकड़ों ने राजधानी में जल प्रबंधन मॉडल को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

