दिल्ली सरकार ने कोचिंग संस्थानों को दिया एक महीने का अल्टीमेटम; सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने पर होगी सीलिंग: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

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नई दिल्ली, 27 जून: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी के सभी कोचिंग संस्थानों को अनिवार्य अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए एक महीने की समय-सीमा दी है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि के भीतर नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सीलिंग भी शामिल है।

सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर जारी संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की चिंता कोचिंग संस्थानों की संख्या नहीं, बल्कि वहां पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा और जीवन है।

“एक महीना। यही अंतिम समय-सीमा है। दिल्ली में कितने कोचिंग संस्थान हैं, यह मुद्दा नहीं है। हमारे बच्चों की सुरक्षा और संरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है,” उन्होंने कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन कोचिंग संस्थानों में फायर ऑडिट, अनिवार्य सुरक्षा उपकरण या निर्धारित सुरक्षा व्यवस्थाएं नहीं होंगी, उन्हें एक महीने के भीतर सभी कमियां दूर करनी होंगी। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए संस्थानों को सील भी किया जा सकता है।

उन्होंने छात्रों से भी अपील की कि यदि किसी कोचिंग संस्थान में सुरक्षा संबंधी लापरवाही दिखाई दे तो वे संदेश, ई-मेल या फोन के माध्यम से इसकी सूचना दें। सरकार प्रत्येक शिकायत पर कार्रवाई करेगी।

“हमारे बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा,” मुख्यमंत्री ने कहा।

कोचिंग संस्थानों के लिए जारी सुरक्षा चेकलिस्ट

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के साथ एक विस्तृत सुरक्षा चेकलिस्ट भी साझा की, जिसमें प्रत्येक कोचिंग संस्थान में उपलब्ध होने वाले आवश्यक सुरक्षा उपकरणों और व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है।

चेकलिस्ट के अनुसार प्रत्येक संस्थान में निम्नलिखित व्यवस्थाएं होनी चाहिए—

  • फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) – शुरुआती आग पर तुरंत नियंत्रण के लिए।
  • स्मोक डिटेक्टर – धुएं का प्रारंभिक स्तर पर पता लगाने के लिए।
  • फायर अलार्म सिस्टम – आपात स्थिति में तुरंत चेतावनी देने के लिए।
  • इमरजेंसी एग्जिट साइनज – सुरक्षित निकास मार्ग दिखाने के लिए।
  • इमरजेंसी लाइट्स – बिजली गुल होने या आपदा के दौरान प्रकाश व्यवस्था के लिए।
  • फर्स्ट एड किट – प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के लिए।
  • सीसीटीवी कैमरे – परिसर की सुरक्षा निगरानी के लिए।
  • पब्लिक एड्रेस सिस्टम/स्पीकर – आपातकालीन घोषणाओं के लिए।
  • फायर एग्जिट डोर – सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए।
  • इवैक्युएशन प्लान डिस्प्ले – आपातकालीन निकासी योजना प्रदर्शित करने के लिए।
  • रेत/फायर बकेट – शुरुआती आग बुझाने में सहायता के लिए।
  • एमसीबी/ईएलसीबी आधारित विद्युत सुरक्षा प्रणाली – शॉर्ट सर्किट और करंट से बचाव के लिए।
  • इमरजेंसी कॉन्टैक्ट बोर्ड – आपातकालीन संपर्क नंबर प्रदर्शित करने के लिए।
  • आपातकालीन जल उपलब्धता – आग बुझाने में सहायता के लिए।
  • इमरजेंसी असेंबली प्वाइंट – निकासी के बाद छात्रों और कर्मचारियों के सुरक्षित एकत्रीकरण के लिए।

इस सुरक्षा संदेश में “Safe Centre • Safe Students • Safe Future” का संदेश भी दिया गया है, जिसका उद्देश्य कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करना है।

दिल्ली सरकार ने कहा है कि संबंधित विभाग एक महीने की अवधि के बाद सभी संस्थानों की जांच करेंगे। निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के विरुद्ध सीलिंग सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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