रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले में एनआईए की सप्लीमेंट्री चार्जशीट; फरार कथित मुख्य साजिशकर्ता समेत तीन और आरोपी नामजद

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नई दिल्ली, 27 जून: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली के रेड फोर्ट के पास नवंबर 2025 में हुए वाहन बम विस्फोट मामले में फरार आरोपी समेत तीन और आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। इस विस्फोट में 11 लोगों की मौत हुई थी।

एनआईए द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आरसी-21/2025/एनआईए/डीएलआई मामले में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जमीर अहमद आहंगर, तुफैल अहमद भट और मुजफ्फर अहमद उर्फ फराज उर्फ जफर, तीनों जम्मू-कश्मीर निवासी, को आरोपी बनाया गया है।

इसके साथ ही इस मामले में चार्जशीट किए गए आरोपियों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जिसमें मृत मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी भी शामिल हैं।

फरार आरोपी पर आतंक मॉड्यूल का संस्थापक सदस्य होने का आरोप

एनआईए के अनुसार, फरार आरोपी मुजफ्फर अहमद, जो पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ (एमबीबीएस, एमडी) है, सह-आरोपी डॉ. आदिल अहमद राथर का बड़ा भाई है और कथित तौर पर “एजीयूएच इंटरिम” नामक संगठन का संस्थापक सदस्य है, जिसे एजेंसी ने अल-कायदा का एक कथित सहयोगी मॉड्यूल बताया है।

एनआईए का आरोप है कि मुजफ्फर ने सह-आरोपी उमर, मुजम्मिल, आदिल और मुफ्ती इरफान के साथ मिलकर 10 नवंबर 2025 को हुए व्हीकल-बोर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) विस्फोट की साजिश रची थी।

एजेंसी के अनुसार, मुजफ्फर जून 2022 में श्रीनगर के ईदगाह में हुई एक गुप्त बैठक में शामिल हुआ था, जहां कथित तौर पर “एजीयूएच इंटरिम” मॉड्यूल का गठन किया गया था।

एनआईए ने आरोप लगाया कि मुजफ्फर हरियाणा के अल-फलाह विश्वविद्यालय, फरीदाबाद में कथित गुप्त ठिकाने पर टीएटीपी आधारित आईईडी के निर्माण, परीक्षण और सुरक्षित रख-रखाव में भी शामिल था।

एनआईए ने बताया कि मुजफ्फर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया गया है और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

अन्य आरोपियों की कथित भूमिका

एनआईए के अनुसार, जमीर अहमद आहंगर कथित तौर पर संगठन का ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) था और हथियार, गोला-बारूद तथा नकदी पहुंचाने का काम करता था।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि तुफैल अहमद भट, जो प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का पूर्व ओवरग्राउंड वर्कर रहा है, मॉड्यूल के लिए हथियार उपलब्ध कराता था।

एनआईए के अनुसार, तुफैल ने कथित तौर पर एक एके-47 राइफल, एक क्रिंकोव राइफल, एक पिस्तौल, मैगजीन और जिंदा कारतूस एक हैंडलर द्वारा संचालित ‘डेड ड्रॉप’ व्यवस्था के माध्यम से प्राप्त किए और इन्हें मृत मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी को ₹3 लाख में उपलब्ध कराया।

इन धाराओं के तहत लगाए गए आरोप

एनआईए ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी जमीर और तुफैल के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 13, 18, 20, 23, 38 और 39, तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2), 147, 148 और 152 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

मुजफ्फर के खिलाफ इसके अतिरिक्त बीएनएस की धारा 61(2), 103(1), 109(1), 118(1) और 118(2), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3, 4 और 5, तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPP Act) की धारा 3 और 4 के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।

एनआईए ने कहा कि वैज्ञानिक फोरेंसिक जांच, कथित साजिश से जुड़े स्थानों की जियो-लोकेशन मैपिंग तथा वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण के आधार पर आरोपियों के बीच संबंध स्थापित किए गए हैं।

एजेंसी ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है।

कानूनी अस्वीकरण: इस चार्जशीट में लगाए गए आरोप राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के हैं। आरोपियों का दोषी या निर्दोष होना संबंधित न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर तय किया जाएगा।

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