नई दिल्ली, 11 जुलाई: दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक अवसंरचना परियोजनाओं में देरी और बढ़ती लागत से निपटने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को आक्रामक रूप से अपनाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री श्री प्रवेश वर्मा ने की।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे ऐसी परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करें जो PPP मॉडल के अनुरूप हों और निजी निवेश को आकर्षित कर सकें।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “पिछले वर्षों में कई परियोजनाएं धन की कमी के कारण अधूरी रह गईं या लागत में अत्यधिक वृद्धि हुई। PPP मॉडल अपनाकर हम इन बाधाओं को पार कर समय पर परियोजनाएं पूरी कर सकते हैं।”
PPP मॉडल के तहत, निजी कंपनियां सार्वजनिक अवसंरचना में निवेश करती हैं और बदले में उन्हें वाणिज्यिक उपयोग या टोल जैसी सुविधाओं के माध्यम से राजस्व अर्जित करने का अधिकार मिलता है। सरकार अब सार्वजनिक परियोजनाओं में वाणिज्यिक घटकों जैसे विज्ञापन अधिकारों को शामिल करने की संभावना पर भी विचार कर रही है।
दिल्ली सचिवालय में आज PWD विभाग की समीक्षा बैठक हुई जिसमें चल रहे सभी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की प्रगति का मूल्यांकन किया गया।
— Parvesh Sahib Singh (@p_sahibsingh) July 9, 2025
बैठक में अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने, कार्य की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने, ज़मीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने और… pic.twitter.com/eRxNJTh8v4
हाल के महीनों में सरकार ने जल और परिवहन क्षेत्रों में PPP आधारित योजनाएं शुरू की हैं। जैसे—नालों पर छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाने की योजना, जहां कंपनियां विज्ञापन के बदले इन्हें गोद ले सकती हैं। इसी तरह, दिल्ली परिवहन निगम (DTC) बस स्टॉप्स पर जल कूलर स्थापित करने का काम निजी कंपनियों को दिया गया है, जिन्हें बदले में कूलर पर विज्ञापन करने की अनुमति दी गई है।
PWD पहले ही ‘गोद लें फ्लाईओवर’ नीति लागू कर चुका है, जिसमें कंपनियों को फ्लाईओवर के रखरखाव के बदले विज्ञापन की अनुमति दी जाती है।
PWD, जो दिल्ली की सड़कों, पुलों और सार्वजनिक भवनों के निर्माण व रखरखाव की जिम्मेदारी संभालता है, अब PPP मॉडल के कार्यान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाएगा। विभाग वर्तमान में उन परियोजनाओं की पहचान कर रहा है जिन्हें PPP के माध्यम से क्रियान्वित किया जा सकता है।
दिल्ली में PWD लगभग 1,400 किलोमीटर लंबी, 60 फीट या उससे चौड़ी सड़कों का प्रबंधन करता है। सरकार का उद्देश्य इस मॉडल के जरिए अवसंरचना विकास को गति देना और राजकोषीय बोझ को कम करना है।