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दिल्ली के ‘जीरो वेस्ट कॉलोनी’ मॉडल की एलजी ने सराहना; सभी आरडब्ल्यूए से अपनाने की अपील

नई दिल्ली, 23 जून: दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने राजधानी की नवजीवन विहार कॉलोनी का दौरा कर उसे दिल्ली की प्रेरणादायक ‘जीरो वेस्ट कॉलोनी’ का मॉडल बताया और राजधानी की अन्य रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) से इस मॉडल को अपनाने की अपील की।

उपराज्यपाल ने अपने दौरे के दौरान कॉलोनी के रिड्यूस-रीयूज़-रीसायकल (RRR) सेंटर, विकेंद्रीकृत कम्पोस्टिंग इकाइयों, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण व्यवस्था तथा स्थानीय स्तर पर स्थापित वर्षा जल संचयन प्रणाली का निरीक्षण किया।

मिशन LiFE और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की मिसाल

संधू ने कहा कि यह सामुदायिक प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ पहल के तहत परिकल्पित परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांतों को साकार करता है।

उन्होंने कॉलोनी के निवासियों और आरडब्ल्यूए की सराहना करते हुए कहा कि पिछले लगभग आठ वर्षों से इस मॉडल को सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है और इसके माध्यम से 10 लाख किलोग्राम से अधिक कचरे को दिल्ली के लैंडफिल स्थलों तक पहुंचने से रोका गया है।

‘कचरे से संपदा’ की शुरुआत घर से

उपराज्यपाल ने कहा कि टिकाऊ कचरा प्रबंधन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनभागीदारी और व्यवहार में स्थायी परिवर्तन आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “कचरे से संपदा की यात्रा घर से शुरू होती है। यदि नागरिक स्वयं जिम्मेदारी लें और कचरे का पृथक्करण करें, तो शहरों को स्वच्छ और टिकाऊ बनाया जा सकता है।”

सभी आरडब्ल्यूए से मॉडल अपनाने की अपील

संधू ने दिल्ली की सभी आरडब्ल्यूए से नवजीवन विहार के इस विकेंद्रीकृत मॉडल का अध्ययन करने और इसे अपने क्षेत्रों में लागू करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण, पुनर्चक्रण, कम्पोस्टिंग और जल संरक्षण जैसे उपाय स्वच्छ और हरित दिल्ली के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सामुदायिक भागीदारी की सराहना

उपराज्यपाल ने कहा कि यह पहल इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि सामूहिक नागरिक जिम्मेदारी से किस प्रकार स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहरी वातावरण तैयार किया जा सकता है।

उन्होंने निवासियों की कचरा पृथक्करण, पुनर्चक्रण, कम्पोस्टिंग और जल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे सामुदायिक प्रयासों को प्रशासन का पूरा सहयोग और समर्थन मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नवजीवन विहार मॉडल दिल्ली के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है और इसे व्यापक स्तर पर लागू कर राजधानी में कचरा प्रबंधन की चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान विकसित किया जा सकता है।

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