नई दिल्ली: दिल्ली के मेयर का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और नए मेयर के चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। संभावना है कि अप्रैल के अंत तक चुनाव की तारीखों का ऐलान हो जाएगा और अगले महीने दिल्ली को नया मेयर मिल जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दिल्ली का अगला मेयर कौन होगा? मौजूदा आंकड़ों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पास बहुमत होने के कारण उसका पलड़ा भारी नजर आ रहा है।
कैसे तय होता है बहुमत:
दिल्ली मेयर चुनाव में कुल 273 मतदाता होते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- 249 पार्षद
- 14 विधायक (विधानसभा द्वारा मनोनीत)
- 10 सांसद (7 लोकसभा + 3 राज्यसभा)
मेयर बनने के लिए 137 वोटों की आवश्यकता होती है।
पार्टीवार स्थिति:
- बीजेपी: 123 पार्षद + 7 सांसद + 11 विधायक = 141 वोट
- आम आदमी पार्टी: 100 पार्षद + 3 सांसद + 3 विधायक = 106 वोट
यदि आम आदमी पार्टी को अन्य दलों का समर्थन भी मिल जाए—जैसे कांग्रेस (9), इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (15), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (1) और एक निर्दलीय—तो भी उसका कुल आंकड़ा लगभग 132 वोट ही बनता है, जो बहुमत से कम है।
राजनीतिक स्थिति:
हालांकि बीजेपी के पास सिर्फ कुछ वोटों का अंतर है, लेकिन वह बहुमत के आंकड़े 137 से ऊपर है, जिससे उसकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी को मेयर बनाने के लिए बीजेपी के पार्षदों से क्रॉस वोटिंग की जरूरत होगी, जो वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में मुश्किल नजर आती है।
दिल्ली ने पहले भी मेयर चुनाव में बड़ा राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखा है। वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी ने भारी राजनीतिक संघर्ष के बाद मेयर पद हासिल किया था। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों और आंकड़ों के आधार पर इस बार स्थिति अलग दिखाई दे रही है।
कुल मिलाकर, मौजूदा संख्या बल को देखते हुए इस बार भी दिल्ली में बीजेपी का मेयर बनने की संभावना मजबूत मानी जा रही है, जब तक कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर नहीं होता।

