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दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: बहु-राज्य आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बहु-राज्य स्तर पर फैले आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस पूरे ऑपरेशन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मुख्य साजिशकर्ता शब्बीर अहमद लोन को दिल्ली सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से एक बड़े आतंकी हमले की साजिश नाकाम हुई है।

इस मामले की शुरुआत 7 फरवरी को हुई, जब दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में “फ्री कश्मीर” जैसे देश विरोधी पोस्टर लगाए गए थे। सबसे पहले सीआईएसएफ के जवानों की नजर इन पोस्टरों पर पड़ी, जिसके बाद मेट्रो पुलिस को सूचना दी गई और मामला दर्ज कर जांच शुरू हुई।

सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के जरिए दो संदिग्धों की पहचान की गई। उनकी गतिविधियों को ट्रैक करने पर पता चला कि पोस्टर लगाने के बाद वे कोलकाता भाग गए थे। 13 फरवरी को यह केस दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सौंपा गया, जिसके बाद टीम तुरंत कोलकाता पहुंची और उमर फारूक तथा रबीउल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में दोनों आरोपियों ने खुलासा किया कि वे अकेले काम नहीं कर रहे थे, बल्कि बांग्लादेश में बैठे एक हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहे थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और कोलकाता व तमिलनाडु में लगातार छापेमारी की गई। अगले नौ दिनों में कुल आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से 12 मोबाइल फोन और 16 सिम कार्ड बरामद हुए, जिससे यह साफ हो गया कि एक संगठित कम्युनिकेशन नेटवर्क सक्रिय था।

इसके बाद कश्मीर में काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट ने गंदरबल, शोपियां और श्रीनगर के कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क बांग्लादेश और पाकिस्तान से संचालित एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल का हिस्सा था।

सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब खुफिया सूचना के आधार पर दिल्ली पुलिस ने जाल बिछाकर शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार किया। एजेंसियां पिछले दो महीनों से उसकी तलाश में थीं।

जांच में सामने आया है कि लोन के संबंध लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए हैं और वह देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं की भर्ती कर स्लीपर सेल सक्रिय करने की साजिश रच रहा था। दिल्ली, कोलकाता और तमिलनाडु जैसे राज्यों में नेटवर्क फैलाने की योजना थी।

लोन का आपराधिक इतिहास भी गंभीर रहा है। उसे पहले 2007 में हथियारों और विस्फोटकों के साथ गिरफ्तार किया गया था और उसने पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में प्रशिक्षण भी लिया था। जेल से रिहा होने के बाद वह बांग्लादेश चला गया, जहां उसने दोबारा नेटवर्क खड़ा किया।

उसके पास से बांग्लादेशी, नेपाली, पाकिस्तानी और भारतीय मुद्रा के साथ विदेशी सिम कार्ड भी बरामद हुआ है, जिससे उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पुष्टि होती है।

फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं, जिसमें फंडिंग चैनल, हैंडलर और अन्य सहयोगियों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते की गई कार्रवाई से एक बड़े आतंकी हमले को टाल दिया गया है।

देशभर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और स्लीपर सेल नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए अभियान जारी है।

यह भी पढ़ें: गाजीपुर बॉर्डर से लश्कर लिंक आतंकी गिरफ्तार, दिल्ली में बड़ा हमला टला


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