नई दिल्ली, 30 मई: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए आठ संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह मॉड्यूल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के निर्देश पर संचालित हो रहा था और इसके तार मुंबई अंडरवर्ल्ड से भी जुड़े हुए पाए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों का दावा है कि गिरफ्तार आरोपी दिल्ली, मुंबई और देश के अन्य प्रमुख शहरों में सरकारी प्रतिष्ठानों, रणनीतिक ठिकानों, सुरक्षा बलों के कर्मियों तथा धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर बड़े आतंकी हमलों की साजिश रच रहे थे। एजेंसियों का मानना है कि इन हमलों का उद्देश्य देश में दहशत फैलाना और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना था।
स्पेशल सेल के अधिकारियों के मुताबिक जांच की शुरुआत खुफिया सूचनाओं के आधार पर हुई, जिसमें पता चला था कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर दिल्ली और मुंबई में हमलों को अंजाम देने के लिए स्थानीय युवाओं की भर्ती कर रहे हैं। शुरुआती कार्रवाई में 17 और 19 मई को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उनकी पूछताछ के दौरान दिल्ली और मुंबई में अलग-अलग आतंकी टीमों के गठन की जानकारी मिली।
जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क को संचालित करने वाले हैंडलर न केवल पाकिस्तान में बैठे थे, बल्कि उनका सीधा संपर्क अंडरवर्ल्ड से भी था। इसके बाद मुंबई और पंजाब में छापेमारी कर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा है कि दिल्ली में आतंकी हमले की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी थी।
जांच एजेंसियों ने इस मॉड्यूल के चार प्रमुख पाकिस्तान आधारित हैंडलरों की पहचान मुन्ना जगड़ा, याबर खान, शहजाद भट्टी और आमिर जट्ट के रूप में की है। अधिकारियों के अनुसार ये सभी पाकिस्तान के कराची से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे और भारत में मौजूद मॉड्यूल को निर्देश दे रहे थे।
इस मामले में पुणे से कुख्यात शूटर विजय डॉन को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर झारखंड के साहिबगंज से एक अन्य आरोपी को पकड़ा गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों आरोपी पाकिस्तान में बैठे शहजाद भट्टी के सीधे संपर्क में थे।
इसके बाद मुंबई से तौकीर और अरबाज खान को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर विजय डॉन के माध्यम से इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे। आगे की पूछताछ में कुछ और नाम सामने आए और आरोपियों ने खुलासा किया कि दिल्ली में बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की तैयारी अंतिम चरण में थी।
जांच एजेंसियों को आरोपियों के कब्जे से दिल्ली और मुंबई के कई महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी से जुड़े वीडियो भी मिले हैं। इनमें मुंबई का दादर रेलवे स्टेशन, कई प्रमुख पुल तथा दिल्ली की कई रणनीतिक लोकेशन शामिल हैं। इन वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार मुन्ना जगड़ा इस पूरे नेटवर्क का एक प्रमुख किरदार है। जांच में पता चला है कि वर्ष 2000 में बैंकॉक में छोटा राजन पर हुए हमले में भी उसका नाम सामने आया था। बैंकॉक जेल में सजा काटने के बाद वह पाकिस्तान चला गया और वर्तमान में कराची से अपने नेटवर्क का संचालन कर रहा है।
पुलिस का यह भी दावा है कि मुन्ना जगड़ा ने अपने करीबी सहयोगी कामी लामा, जो नेपाल का रहने वाला बताया जाता है, को दिल्ली भेजा था। उसने इस मॉड्यूल को आर्थिक और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई।
स्पेशल सेल की कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से चार हैंड ग्रेनेड, दो ग्लॉक पिस्तौल और पाकिस्तान में निर्मित 25 जिंदा कारतूस बरामद किए गए। अधिकारियों ने बताया कि बरामद ग्रेनेड को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि हथियारों और गोला-बारूद की यह खेप ड्रोन के जरिए भारत में पहुंचाई गई थी। बरामद कारतूस पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में निर्मित बताए जा रहे हैं, जिससे इस साजिश में सीमा पार से मिली सहायता की आशंका और मजबूत हो गई है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार आतंकियों के निशाने पर महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठान, सुरक्षा बलों के जवान, सार्वजनिक स्थान और धार्मिक स्थल थे। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक बड़े आतंकी हमले को टाल दिया गया है।
स्पेशल सेल अब आरोपियों के वित्तीय लेनदेन, डिजिटल संचार, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस मॉड्यूल के संबंध अन्य आपराधिक और आतंकी संगठनों से तो नहीं हैं।
अधिकारियों ने इसे हाल के वर्षों में दिल्ली पुलिस की सबसे महत्वपूर्ण आतंकवाद-रोधी सफलताओं में से एक बताया है। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

