नई दिल्ली, 27 जून: दवाओं की खरीद, भंडारण और प्रबंधन में कथित गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद दिल्ली सरकार ने सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) के पांच फार्मासिस्ट और दो अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकारी बयान के अनुसार, सीपीए के विभिन्न स्टोरों में की गई जांच के दौरान दवाओं की खरीद, भंडारण और प्रबंधन में गंभीर कथित अनियमितताएं और लापरवाही सामने आई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है और प्रशासन के किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, लापरवाही या अनियमितताओं को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
“जनहित से जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही में दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी,” मुख्यमंत्री ने कहा।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इस दिशा में अब तक कई प्रशासनिक फेरबदल किए जा चुके हैं। साथ ही विभिन्न विभागों में जांच भी शुरू की गई है।
सरकारी बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री नियमित रूप से विभिन्न विभागों का औचक निरीक्षण करती हैं और जहां भी अनियमितताएं सामने आती हैं, वहां त्वरित एवं निर्णायक कार्रवाई की जाती है।
सरकार विभिन्न विभागों में ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करने पर भी काम कर रही है, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितताओं की गुंजाइश न रहे।
बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर आयोजित होने वाली जन सुनवाई भी सार्वजनिक और निजी संस्थानों से जुड़ी विभिन्न अनियमितताओं को उजागर करने में प्रभावी साबित हुई है। इन जन शिकायतों के आधार पर कई मामलों में लोगों की समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्रवाई की गई है।
सरकार ने कहा कि यह कार्रवाई प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

