त्रिशूर (केरल)/बेंगलुरू/नई दिल्ली, 15 जून: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आरएसएस के पंजीकरण को लेकर उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए कहा कि संगठन की गतिविधियां पूरी तरह खुली हैं और इसे गुप्त संगठन बताना गलत है। उन्होंने पंजीकरण की मांग को राजनीतिक “गिमिक” करार दिया।
केरल के त्रिशूर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं के साथ संवाद करते हुए मोहन भागवत से कर्नाटक सरकार और विशेष रूप से मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा आरएसएस के पंजीकरण और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर उठाए गए सवालों पर प्रतिक्रिया मांगी गई।
प्रश्न में प्रियंक खड़गे द्वारा आरएसएस प्रमुख को लिखे गए कथित पत्र का उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने पूछा था कि करोड़ों लोगों से जुड़े इतने बड़े संगठन का संचालन किस कानूनी आधार पर किया जा रहा है और यह अब तक एक पंजीकृत संस्था के रूप में क्यों कार्य नहीं कर रहा है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि उन्हें इस प्रकार के सवालों का उत्तर देना आवश्यक नहीं लगता।
उन्होंने कहा, “मुझे इसका जवाब देने की आवश्यकता नहीं है। देश में अनेक ऐसी गतिविधियां और संस्थाएं हैं जो पंजीकृत नहीं हैं। हम कोई गुप्त कार्य नहीं कर रहे हैं। हमारी सभी गतिविधियां खुले मैदानों और सार्वजनिक स्थानों पर होती हैं।”
भागवत ने कहा कि आरएसएस का कार्य समाज के सामने खुलकर होता है और संगठन की गतिविधियों में किसी प्रकार की गोपनीयता नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ वर्षों से समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
आरएसएस प्रमुख ने पंजीकरण और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठाए जा रहे सवालों को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह एक “गिमिक” से अधिक कुछ नहीं है।
यह विवाद उस समय सामने आया है जब कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने हाल ही में कहा था कि राष्ट्रवाद, अनुशासन और कर्तव्य की बात करने वाले संगठन को पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और संविधान के प्रति सम्मान भी दिखाना चाहिए।
खड़गे ने अपने पत्र में कहा था कि देश में श्रमिक संगठन, धार्मिक संस्थाएं, ट्रस्ट, गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), कंपनियां और आम नागरिक तक पंजीकरण, लेखा-परीक्षा, कर भुगतान और विभिन्न कानूनी प्रावधानों का पालन करते हैं। ऐसे में आरएसएस को भी समान मानकों का पालन करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा था कि आरएसएस को अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर स्वयं को पंजीकृत करना चाहिए, अपनी गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन का खुलासा करना चाहिए तथा लागू करों का भुगतान करना चाहिए।
हालांकि, मोहन भागवत ने इन मांगों को महत्व नहीं देते हुए दोहराया कि संघ की गतिविधियां पूरी तरह सार्वजनिक हैं और संगठन के खिलाफ लगाए जा रहे गोपनीयता के आरोप निराधार हैं।
आरएसएस और कर्नाटक सरकार के बीच यह मुद्दा अब राजनीतिक और वैचारिक बहस का विषय बनता जा रहा है। एक ओर प्रियंक खड़गे संगठन की कानूनी और वित्तीय जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आरएसएस नेतृत्व का कहना है कि उसकी गतिविधियां पूरी तरह पारदर्शी हैं और उन्हें किसी अतिरिक्त प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।

