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यमुना सफाई मिशन की अमित शाह ने की समीक्षा; 97% गाद हटाने का काम पूरा, डेयरी कचरे से बनेगी बायोगैस

नई दिल्ली, 8 जून: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को यमुना नदी के पुनर्जीवन और सफाई अभियान की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने और नदी की स्थिति में स्थायी सुधार लाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए केंद्र, दिल्ली, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश की एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।

डेयरी कचरे से बनेगी बायोगैस और खाद

बैठक में निर्णय लिया गया कि दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच जल्द ही एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

इस पहल के तहत दिल्ली की डेयरियों से निकलने वाले अपशिष्ट को यमुना में जाने से रोका जाएगा और उसका उपयोग गोबर गैस (बायोगैस) तथा जैविक खाद बनाने में किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इससे यमुना में प्रदूषण कम होगा और अपशिष्ट का उपयोगी संसाधनों में रूपांतरण भी संभव होगा।

यमुना में गिरने वाले नालों की 97% गाद हटाई गई

अमित शाह ने बताया कि इस वर्ष यमुना में गिरने वाले नालों से 28.57 लाख मीट्रिक टन गाद हटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें से 97 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

उन्होंने कहा कि निकाली गई गाद का उपयोग निर्माण कार्यों में किया जाएगा ताकि वह दोबारा यमुना में न पहुंचे।

129 एसटीपी चालू, 59 और बनेंगे

बैठक में सीवेज प्रबंधन की भी समीक्षा की गई।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अब तक 129 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) चालू किए जा चुके हैं।

इसके अलावा 2027 के अंत तक 59 नए एसटीपी स्थापित किए जाएंगे, जिससे यमुना में जाने वाले अनुपचारित सीवेज को काफी हद तक रोका जा सकेगा।

दिल्ली, हरियाणा और यूपी मिलकर करेंगे काम

बैठक में शामिल दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि यमुना पुनर्जीवन के लिए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारें तथा संबंधित मंत्रालय एकीकृत कार्ययोजना के तहत एक टीम के रूप में काम करेंगे।

उन्होंने बताया कि यमुना सफाई कार्यों की प्रगति की नियमित निगरानी के लिए एक निश्चित समीक्षा तंत्र भी बनाया जाएगा।

सीवेज और औद्योगिक प्रदूषण पर सख्त निगरानी

बैठक में यमुना में गिरने वाले सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट की निगरानी को और सख्त बनाने पर भी जोर दिया गया।

कार्ययोजना के प्रमुख बिंदु हैं:

  • डेयरी अपशिष्ट से बायोगैस और खाद का उत्पादन।
  • नालों की गाद निकालने की प्रक्रिया में तेजी।
  • निकाली गई गाद का व्यावसायिक उपयोग।
  • सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता का विस्तार।
  • औद्योगिक एवं सीवेज प्रदूषण की सख्त निगरानी।
  • नियमित समीक्षा और समयबद्ध प्रगति मूल्यांकन।

‘स्वच्छ यमुना सर्वोच्च प्राथमिकता’

उपराज्यपाल संधू ने कहा कि स्वच्छ और पुनर्जीवित यमुना दिल्ली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों से यमुना की स्थिति में वास्तविक और स्थायी सुधार देखने को मिलेगा।

यमुना पुनर्जीवन अभियान को लेकर हुई यह समीक्षा बैठक ऐसे समय में हुई है जब सरकार नदी प्रदूषण कम करने और पर्यावरणीय सुधार को लेकर बड़े स्तर पर कदम उठा रही है।

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