नई दिल्ली, 2 जुलाई: दिल्ली सरकार ने सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए व्यापक ‘विंटर पॉल्यूशन मास्टर प्लान’ लागू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया मंच X पर इसकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह कार्ययोजना 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस अवधि के दौरान राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण और सख्त कदम उठाए जाएंगे। इनमें सबसे प्रमुख ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नीति का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। इसके तहत जिन वाहनों के पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें ईंधन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।
सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि बीएस-6 (BS-VI) मानकों से नीचे के बाहरी वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी, ताकि वाहन जनित प्रदूषण को कम किया जा सके।
यदि प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ता है तो आवश्यकता पड़ने पर 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) व्यवस्था भी लागू की जा सकती है।
निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जाएगा, जबकि लोगों को सार्वजनिक परिवहन का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
निर्माण गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बड़े निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग/मिस्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य किया जाएगा। साथ ही निर्माण कार्यों पर आवश्यक पर्यावरणीय नियंत्रण भी लागू किए जाएंगे।
दिल्ली सरकार ने कचरा, सूखी पत्तियां और बायोमास जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का भी निर्णय लिया है, क्योंकि ये सर्दियों में वायु प्रदूषण बढ़ाने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि नियमों के पालन की निगरानी के लिए ड्रोन के माध्यम से सर्विलांस किया जाएगा। प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की पहचान कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार का यह विंटर पॉल्यूशन मास्टर प्लान तकनीक आधारित, प्रभावी और समयबद्ध रणनीति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य सर्दियों के दौरान राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार करना और नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

