ईडी ने PACL की ₹9,420 करोड़ मूल्य की 282 संपत्तियां जस्टिस लोढ़ा समिति को सौंपीं; लाखों निवेशकों को राहत की उम्मीद

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नई दिल्ली, 9 जून: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश के सबसे बड़े निवेश घोटालों में से एक पीएसीएल (PACL) मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 282 अचल संपत्तियों, जिनका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग ₹9,420.57 करोड़ है, को जस्टिस आर.एम. लोढ़ा समिति को सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस कदम से वर्षों से अपने धन की वापसी का इंतजार कर रहे लाखों निवेशकों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

ईडी के अनुसार, विशेष पीएमएलए अदालत ने इन 282 संपत्तियों को जस्टिस लोढ़ा समिति को हस्तांतरित करने का आदेश दिया है ताकि संपत्तियों की बिक्री कर निवेशकों को धन वापस लौटाने की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।

पीएसीएल घोटाला उस समय सामने आया था जब कंपनी और उसके प्रमोटरों पर देशभर में अवैध सामूहिक निवेश योजना (Collective Investment Scheme) चलाकर लाखों लोगों से धन जुटाने का आरोप लगा था। सीबीआई द्वारा दायर आरोपपत्रों के अनुसार, पीएसीएल लिमिटेड ने देशभर के निवेशकों से ₹68,000 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई थी।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, निवेशकों को भूमि आधारित योजनाओं के नाम पर निवेश के लिए प्रेरित किया गया। कई मामलों में लोगों को भूमि आवंटन और पंजीकरण पत्र जारी किए गए, जबकि संबंधित भूमि का वास्तविक स्वामित्व ही उपलब्ध नहीं था। परिणामस्वरूप लाखों निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

ईडी ने बताया कि अब भी लगभग ₹48,000 करोड़ की राशि निवेशकों को वापस की जानी बाकी है।

ईडी ने PACL की ₹9,420 करोड़ मूल्य की 282 संपत्तियां जस्टिस लोढ़ा समिति को सौंपीं; लाखों निवेशकों को राहत की उम्मीद
ईडी ने PACL की ₹9,420 करोड़ मूल्य की 282 संपत्तियां जस्टिस लोढ़ा समिति को सौंपीं; लाखों निवेशकों को राहत की उम्मीद
ईडी ने PACL की ₹9,420 करोड़ मूल्य की 282 संपत्तियां जस्टिस लोढ़ा समिति को सौंपीं; लाखों निवेशकों को राहत की उम्मीद
ईडी ने PACL की ₹9,420 करोड़ मूल्य की 282 संपत्तियां जस्टिस लोढ़ा समिति को सौंपीं; लाखों निवेशकों को राहत की उम्मीद

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच ईडी ने 26 जुलाई 2016 को दर्ज ईसीआईआर (ECIR) के आधार पर शुरू की थी। जांच के दौरान पता चला कि अपराध से अर्जित धन को विभिन्न कंपनियों, सहयोगी संस्थाओं और परिजनों के माध्यम से कई स्तरों पर स्थानांतरित कर भारत और विदेशों में अचल संपत्तियां खरीदी गईं।

ईडी के अनुसार, ये संपत्तियां मुख्य रूप से दिवंगत निर्मल सिंह भंगू, उनके परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों से जुड़ी संस्थाओं के नाम पर थीं। इनमें उनकी बेटी बरिंदर कौर, दामाद हरसतिंदर पाल सिंह हेयर, बेटी सुखविंदर कौर, दामाद गुरप्रताप सिंह और पत्नी प्रेम कौर के नाम भी शामिल हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि केवल चालू वित्त वर्ष में ही लगभग ₹1,595.85 करोड़ मूल्य की संपत्तियां अटैच की गई हैं। इसके साथ ही पीएसीएल मामले में अब तक कुल ₹28,626 करोड़ मूल्य की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं।

इन संपत्तियों में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा ऑस्ट्रेलिया सहित विदेशों में स्थित संपत्तियां भी शामिल हैं।

ईडी ने इस मामले में 10 सितंबर 2018 को विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की थी, जिस पर अदालत ने संज्ञान लिया था।

इसके अलावा सुखविंदर कौर और गुरप्रताप सिंह के खिलाफ भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत भी कार्रवाई शुरू की गई है। मामले के प्रमुख आरोपी हरसतिंदर पाल सिंह हेयर को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बरिंदर कौर और प्रेम कौर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं।

यह पूरा मामला 2 फरवरी 2016 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उस महत्वपूर्ण आदेश से जुड़ा है, जिसमें सुब्रत भट्टाचार्य बनाम सेबी मामले में शीर्ष अदालत ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में समिति गठित करने का निर्देश दिया था। समिति को पीएसीएल की संपत्तियों के परिसमापन और निवेशकों को धन वापसी की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

ईडी ने कहा कि ₹9,420 करोड़ से अधिक मूल्य की 282 संपत्तियों की बहाली निवेशकों के धन की वापसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और एजेंसी अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान, कुर्की और निवेशकों को उनकी वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मामले की आगे की जांच जारी है।

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