नई दिल्ली: नगर निगम दिल्ली (MCD) के आयुक्त संजीव खिरवार ने सफाई कर्मचारी यूनियन के नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें ठेका कर्मचारियों की तैनाती, भुगतान व्यवस्था और सफाई कार्यों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक के दौरान यूनियन नेताओं ने करीब 600 ठेका कर्मचारियों की तैनाती पर कड़ा विरोध जताया, खासकर रेलवे ट्रैक जैसे संवेदनशील इलाकों में उनकी ड्यूटी को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि ऐसे कार्यों के लिए नियमित कर्मचारियों का उपयोग किया जाना चाहिए।
यूनियन ने ठेका प्रणाली में हो रहे खर्च पर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि ठेकेदारों के माध्यम से बड़ी राशि खर्च हो रही है, जबकि कर्मचारियों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने मांग की कि वेतन सीधे एमसीडी द्वारा दिया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी तरह की कमीशनबाजी न हो।
इस पर आयुक्त संजीव खिरवार ने स्पष्ट किया कि ठेका कर्मचारियों की तैनाती उन क्षेत्रों में की गई है, जहां सुरक्षा कारणों से नियमित कर्मचारी काम करने से हिचकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एमसीडी के नियमित कर्मचारी ही प्राथमिकता हैं और उनके हितों की रक्षा की जाएगी।
आयुक्त ने बताया कि यह व्यवस्था अस्थायी है और छह महीने बाद इसकी समीक्षा की जाएगी, यानी यह कोई स्थायी आउटसोर्सिंग नीति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे से भुगतान को लेकर अभी बातचीत जारी है और निगम को अभी तक कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है।
हालांकि, यूनियन नेता अपनी मांग पर अड़े रहे और ठेकेदारों की भूमिका खत्म कर सीधे नियुक्ति और भुगतान की व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई। उन्होंने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताते हुए जोखिम भरे क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की बात कही।
लंबी चर्चा के बाद दोनों पक्षों ने आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। आयुक्त ने आश्वासन दिया कि मौजूदा व्यवस्था की निर्धारित समय के बाद समीक्षा की जाएगी और कर्मचारियों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

