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दिल्ली जिमखाना क्लब पर संकट: लुटियंस दिल्ली की 27 एकड़ जमीन खाली करने के केंद्र के आदेश से मचा विवाद

नई दिल्ली, 30 मई: देश के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली क्लबों में से एक दिल्ली जिमखाना क्लब इन दिनों अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। केंद्र सरकार ने क्लब को 5 जून तक लुटियंस दिल्ली स्थित अपनी 27.3 एकड़ की प्राइम संपत्ति खाली करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के खिलाफ क्लब ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिससे मामला राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।

दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना वर्ष 1913 में ब्रिटिश शासन के दौरान “इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब” के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य ब्रिटिश अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक विशिष्ट मनोरंजन एवं खेल केंद्र उपलब्ध कराना था।

स्वतंत्रता के बाद यह क्लब देश के वरिष्ठ नौकरशाहों, राजनयिकों, सैन्य अधिकारियों, उद्योगपतियों, राजनेताओं और प्रभावशाली परिवारों का प्रमुख सामाजिक केंद्र बन गया। समय के साथ यह केवल एक क्लब नहीं बल्कि सत्ता, प्रभाव और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया।

हजारों करोड़ की जमीन पर स्थित क्लब

सफदरजंग रोड पर स्थित यह क्लब प्रधानमंत्री आवास और कई महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों के निकट स्थित है। लगभग 27.3 एकड़ में फैली इस जमीन को देश की सबसे मूल्यवान सरकारी संपत्तियों में गिना जाता है। विभिन्न अनुमानों के अनुसार केवल भूमि का मूल्य ही लगभग 27,000 करोड़ रुपये तक हो सकता है।

क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

दिल्ली जिमखाना क्लब केवल खेल और मनोरंजन का केंद्र नहीं रहा है। दशकों से यह दिल्ली के सत्ता गलियारों का अनौपचारिक नेटवर्किंग हब माना जाता रहा है, जहां नीतिगत चर्चाएं, कारोबारी बैठकों और राजनीतिक संवाद अक्सर होते रहे हैं।

क्लब में खेल सुविधाएं, रेस्तरां, बार, बैंक्वेट हॉल और विभिन्न आयोजन स्थलों की व्यवस्था है। यहां सदस्यता प्राप्त करना दिल्ली के प्रभावशाली वर्ग में एक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है।

रिपोर्टों के अनुसार, सामान्य सदस्यता के लिए प्रतीक्षा अवधि कई वर्षों से लेकर कई दशकों तक हो सकती है। सदस्यता शुल्क श्रेणी के अनुसार लगभग 7 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक बताया जाता है।

चर्चित सदस्य और प्रभावशाली हस्तियां

वर्षों के दौरान क्लब से जुड़े सदस्यों में वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारी, पूर्व सैन्य अधिकारी, राजनयिक, राजनेता, शीर्ष वकील, पत्रकार और उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां शामिल रही हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी, पूर्व योजना आयोग उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, कांग्रेस सांसद शशि थरूर, ब्रिगेडियर पी.के. सहगल और दिवंगत लेखक-पत्रकार खुशवंत सिंह जैसी हस्तियां भी क्लब से जुड़ी रही हैं।

प्रशासनिक विवाद और एनसीएलटी का हस्तक्षेप

पिछले कुछ वर्षों में क्लब के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और सदस्यता व्यवस्था को लेकर कई विवाद सामने आए। इन विवादों के बाद राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने हस्तक्षेप करते हुए प्रशासकों की नियुक्ति की थी।

इसके बाद क्लब का संचालन अदालत की निगरानी में प्रशासनिक व्यवस्था के तहत किया जा रहा है।

केंद्र सरकार ने क्यों जारी किया बेदखली आदेश?

केंद्र सरकार का कहना है कि क्लब जिस भूमि पर स्थित है वह राष्ट्रीय राजधानी के एक अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में आती है। सरकार के अनुसार यह भूमि सार्वजनिक उपयोग, बुनियादी ढांचा विकास और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के लिए जरूरी है।

सरकार ने यह भी दावा किया है कि क्लब पर लगभग 47 से 48 करोड़ रुपये के बकाया हैं। मूल लीज समझौते के प्रावधानों का हवाला देते हुए सरकार ने भूमि का पुनः कब्जा लेने का निर्णय लिया है।

क्लब सदस्यों की आपत्ति

क्लब प्रबंधन और सदस्य इस आदेश का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिल्ली जिमखाना क्लब एक 100 वर्ष से अधिक पुरानी विरासत संस्था है और इसके अचानक बंद होने से हजारों सदस्य, कर्मचारी और सेवा प्रदाता प्रभावित होंगे।

कई सदस्यों ने आदेश के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान और कानूनी पहल भी शुरू की है। उनका तर्क है कि यदि सरकार को भूमि की आवश्यकता है तो वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान की जानी चाहिए।

सार्वजनिक भूमि बनाम विशेषाधिकार की बहस

इस विवाद ने देश में सार्वजनिक भूमि के उपयोग और विशेषाधिकार प्राप्त संस्थाओं की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है।

एक पक्ष इसे देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी संस्था मानता है, जबकि आलोचकों का कहना है कि ऐसे विशिष्ट क्लब विशाल सरकारी भूमि पर कब्जा बनाए रखते हैं, जबकि आम नागरिकों की पहुंच उनसे लगभग असंभव होती है।

अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि दिल्ली जिमखाना क्लब अपनी ऐतिहासिक पहचान और प्रतिष्ठित ठिकाने को बचा पाएगा या नहीं।

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