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दिल्ली पुलिस ने नाकाम की ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी की साजिश, 72 वर्षीय महिला को साइबर ठगी से बचाया

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की साइबर हेल्पलाइन टीम, इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट तथा रोहिणी जिले के साइबर थाना पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक 72 वर्षीय महिला को “डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी का शिकार होने से बचा लिया गया।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, घर में अकेली रह रही 72 वर्षीय महिला को एक अज्ञात नंबर से फोन कॉल प्राप्त हुआ। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को एक जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि महिला का नाम ₹6 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है।

इसके बाद ठगों ने महिला को वीडियो कॉल पर रखा और उसे बताया कि वह “डिजिटल अरेस्ट” में है। उसे यह विश्वास दिलाया गया कि जांच पूरी होने तक वह लगातार निगरानी में रहेगी और किसी से संपर्क नहीं कर सकती।

पुलिस के मुताबिक, ठगों ने महिला पर इतना मानसिक दबाव और भय पैदा कर दिया कि उन्होंने सामान्य रूप से लोगों से बातचीत करना भी लगभग बंद कर दिया। इसी दौरान एक रिश्तेदार ने जब उनसे बात की तो महिला बार-बार केवल “CBI” शब्द का ही उल्लेख कर रही थीं, जिससे परिजनों को संदेह हुआ कि कुछ गड़बड़ है।

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए एक सतर्क रिश्तेदार ने तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया और मामले की जानकारी दी।

शिकायत मिलते ही साइबर हेल्पलाइन ऑपरेटर कांस्टेबल रेखा, डीसीपी आईएफएसओ की टीम और रोहिणी साइबर थाना पुलिस सक्रिय हो गई। पुलिस टीम तुरंत महिला के घर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

जांच के दौरान पता चला कि महिला वास्तव में एक “डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी का शिकार बन चुकी थीं। हालांकि, पुलिस की समय पर हस्तक्षेप के कारण किसी भी प्रकार की धनराशि ठगों के खाते में ट्रांसफर होने से पहले ही महिला को सुरक्षित बचा लिया गया।

पुलिस अधिकारियों ने महिला को पूरी तरह समझाया कि कोई भी वैध जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती और न ही जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश देती है।

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है। यह केवल साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को डराकर पैसे ऐंठने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक नया तरीका है।

दिल्ली Police ने नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह भी जारी की है:

  • कोई भी पुलिस एजेंसी, CBI, ED या सरकारी विभाग वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करता।
  • कोई सरकारी एजेंसी गिरफ्तारी से बचाने या जांच बंद करने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती।
  • ऐसे किसी भी कॉल या संदेश पर भरोसा न करें।
  • संदिग्ध कॉल मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
  • अपने बुजुर्ग परिजनों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखें, क्योंकि साइबर अपराधी अक्सर वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाते हैं।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सतर्क रिश्तेदार, साइबर हेल्पलाइन ऑपरेटर कांस्टेबल रेखा, IFSO यूनिट तथा रोहिणी साइबर थाना पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, जिनकी वजह से एक बड़ी साइबर ठगी को समय रहते रोका जा सका।

पुलिस ने कहा कि जागरूकता, सतर्कता और समय पर शिकायत दर्ज कराना ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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