नई दिल्ली, 31 मई: दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास स्थित सैदुलाजाब क्षेत्र में शनिवार शाम एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत ढहने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस घटना के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और एमसीडी ने लापरवाही के आरोप में दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है।
पश्चिमी मार्ग (वेस्टर्न मार्ग) स्थित यह इमारत शनिवार शाम करीब 7:35 बजे अचानक भरभराकर गिर गई। इमारत में कोचिंग संस्थान, कैफे और कार्यालय संचालित हो रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के समय इमारत की ऊपरी मंजिल पर निर्माण कार्य भी चल रहा था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मृतकों और घायलों में कुछ ऐसे छात्र भी शामिल थे जो फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। इमारत के पास स्थित एक कैंटीन मेडिकल छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थी और मलबा उसी हिस्से पर भी गिरा।
दक्षिणी जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अनंत मित्तल ने बताया कि पुलिस को शाम करीब 7:35 बजे एक तेज आवाज सुनाई देने और इमारत गिरने की सूचना मिली थी। इसके कुछ ही मिनट बाद पीसीआर कॉल भी प्राप्त हुई, जिसके बाद महरौली थाने की टीम तुरंत मौके पर पहुंची।
डीसीपी ने बताया कि मौके पर पहुंचने पर पता चला कि एक पुरानी इमारत ढह गई है और उसका मलबा पास स्थित पोर्टा-कैबिन जैसी संरचना पर गिरा है, जहां मेडिकल छात्रों द्वारा उपयोग की जाने वाली कैंटीन संचालित थी। आशंका थी कि कई लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।
पुलिस, दमकल और बचाव दलों ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। शुरुआती चरण में लगभग नौ लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया। घायलों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और कई एम्बुलेंस मौके पर तैनात की गईं।
हादसे में पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई। भारी कंक्रीट, लोहे के सरिए और अन्य निर्माण सामग्री आसपास के क्षेत्र में फैल गई। कई लोग मलबे के नीचे फंस गए थे, जिन्हें घंटों की मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।
सभी घायलों को उपचार के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
राहत एवं बचाव अभियान में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS), दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), दिल्ली पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। पूरी रात चले अभियान में भारी मशीनों, हाइड्रोलिक कटर, विक्टिम लोकेशन कैमरों और स्निफर डॉग्स का इस्तेमाल किया गया।
अधिकारियों ने बाद में पुष्टि की कि सभी फंसे हुए लोगों का पता लगा लिया गया है और बचाव अभियान समाप्त कर दिया गया है।
घटना के बाद पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हादसे के पीछे निर्माण संबंधी खामियां, अवैध निर्माण, संरचनात्मक कमजोरी या प्रशासनिक लापरवाही जिम्मेदार थी या नहीं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को घटनास्थल का दौरा कर राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर महरौली थाने में तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया गया।
साथ ही दक्षिण दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट (DM) के नेतृत्व में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं ताकि हादसे के कारणों और जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आसपास के जर्जर और खतरनाक भवनों की पहचान कर उनका निरीक्षण करने तथा आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
घटना के बाद एमसीडी ने भी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए भवन विभाग-II के जूनियर इंजीनियर अमन जैन को कर्तव्य में लापरवाही और जिम्मेदारी के निर्वहन में विफलता के आरोप में निलंबित कर दिया।
इसी प्रकार भवन विभाग-II के सहायक अभियंता (एई) सुदेश सिंह चौहान को प्रभावी निगरानी न करने और कार्य में शिथिलता बरतने के आरोप में निलंबित किया गया है।
दोनों अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई साकेत मेट्रो स्टेशन के निकट गली नंबर-5, वेस्टर्न मार्ग, सैदुलाजाब स्थित संपत्ति के ढहने की घटना से जुड़ी हुई है।
अधिकारियों ने कहा कि पुलिस जांच, मजिस्ट्रियल जांच और विभागीय कार्रवाई के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि दुर्घटना के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है और क्या निर्माण संबंधी नियमों का उल्लंघन किया गया था।
यह हादसा एक बार फिर दिल्ली में भवन सुरक्षा, अवैध निर्माण और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर गया है। विशेष रूप से उन व्यावसायिक क्षेत्रों में, जहां पुरानी और जर्जर इमारतों में अब भी बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

