नई दिल्ली, 8 जुलाई: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को कहा कि राजधानी में संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नियमसम्मत बनाने के उद्देश्य से जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) से जुड़े मामलों की जांच और निगरानी के लिए नई एवं सख्त व्यवस्था लागू की गई है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार ने ऐसे मामलों में राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नियमों का पालन कराने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
नई व्यवस्था के तहत रक्त संबंधियों (ब्लड रिलेटिव्स) के अलावा अन्य व्यक्तियों के पक्ष में निष्पादित किए जाने वाले सभी GPA मामलों की अनिवार्य जांच की जाएगी।
सरकार ने निर्देश दिया है कि ऐसे प्रत्येक मामले को उचित स्टांप शुल्क के निर्धारण के लिए कलेक्टर ऑफ स्टांप के पास भेजना अनिवार्य होगा। प्रत्येक GPA दस्तावेज की विस्तार से जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यदि दस्तावेज में बिक्री, कब्जा हस्तांतरण अथवा स्वामित्व हस्तांतरण से संबंधित प्रावधान हैं, तो उसके अनुरूप निर्धारित स्टांप शुल्क का भुगतान किया गया है।
नई व्यवस्था के अनुसार कलेक्टर ऑफ स्टांप को प्रत्येक मामले में 30 दिनों के भीतर कारण सहित आदेश जारी करना होगा। निर्धारित स्टांप शुल्क का भुगतान किए बिना ऐसे दस्तावेजों का पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए एक महीने के भीतर ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे सभी GPA मामलों की नियमित निगरानी की जा सकेगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार पारदर्शी प्रशासन, सरकारी राजस्व की सुरक्षा और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है तथा संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाया जाएगा।

