नई दिल्ली, 26 मई: केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण एक्शन प्लान की समीक्षा की। बैठक में सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण उपायों को तेज गति से लागू करने पर जोर दिया गया।
बैठक में सड़क धूल नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहन विस्तार, कचरा प्रबंधन और औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण जैसे प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी बैठक में मौजूद रहे।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सभी एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई, समयबद्ध कार्यान्वयन और सख्त प्रवर्तन बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आने वाले कुछ महीने बेहद महत्वपूर्ण हैं और चिन्हित कमियों को मिशन मोड में दूर करना होगा।
सड़क धूल नियंत्रण की समीक्षा के दौरान केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार से अक्टूबर 2026 तक सभी लंबित सड़क पुनर्विकास कार्य पूरे करने और सड़कों के किनारे बड़े स्तर पर हरित क्षेत्र विकसित करने को कहा।
केंद्रीय मंत्री ने मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों (MRSM) की संख्या बढ़ाने और सितंबर 2026 तक 78 बड़ी एवं मध्यम मशीनों के साथ 1000 लिटर पिकर्स तैनात करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि गहरी सफाई और धूल नियंत्रण शहरी प्रदूषण कम करने के सबसे प्रभावी उपायों में शामिल हैं।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर भूपेंद्र यादव ने अधिक इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और पूरे शहर में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने दिल्ली मेट्रो नेटवर्क को और मजबूत करने तथा अंतिम मील कनेक्टिविटी बेहतर बनाने पर भी जोर दिया ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो सके।
बैठक में एंड-ऑफ-लाइफ (EoL) वाहनों को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि NCR से बाहर पुराने वाहनों के ट्रांसफर के लिए NOC प्रक्रिया तेज की जाए और सितंबर 2026 तक सभी सीमा प्रवेश बिंदुओं पर ANPR कैमरे लगाए जाएं।
केंद्र सरकार ने दिल्ली में 15 सिग्नल-फ्री कॉरिडोर विकसित करने का भी सुझाव दिया ताकि ट्रैफिक जाम और वाहन उत्सर्जन कम किया जा सके।
औद्योगिक प्रदूषण की समीक्षा के दौरान भूपेंद्र यादव ने OCEMS और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइसेज की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा और गैर-अनुपालन करने वाली इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
निर्माण एवं विध्वंस (C&D) कचरा प्रबंधन की समीक्षा में प्रतिदिन लगभग 1000 टन क्षमता की कमी सामने आने पर दिसंबर 2026 तक अतिरिक्त प्रोसेसिंग सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
केंद्रीय मंत्री ने खुले में कचरा जलाने की घटनाओं पर चिंता जताते हुए इसके खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने और सख्त प्रवर्तन करने को कहा।
उन्होंने मानसून के बाद बड़े स्तर पर सफाई और हरित अभियान चलाने की भी सलाह दी, ताकि सड़कों और नालों में जमा धूल को नियंत्रित किया जा सके।
बैठक में पर्यावरण मंत्रालय, CAQM, CPCB, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, NDMC, दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस और पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

